रात्रि का घना अँधेरा, छेड़ता है तान ऐसी,
रुद्र का शंखनाद जैसे, या दामिनी की ध्वनि।
हुंकार भरता मद गजानन, शत्रु का प्रतीक है,
हस्त में कृपाण लिए कोई, करता उसका वध है।
सूर्य का रथ थम गया है कहीं,
मधुर संगीत रस पी रहा है उर अभी।
ढलता हुआ समय, नक्षत्रों की छाँव में,
कुछ अनकहे शब्द, जिह्वा पर आ अटके।
श्वासों का मंथन, जन्म लेती आशा,
नव विचारों का उद्गम, प्रकट होती प्रार्थना |
आरंभ एक नया अध्याय का, उजागर होता नवीन पथ,
टूटते कष्टदायक बंधन, लौटती हुई मुस्कान मुख पर।
कहीं यह भ्रम तो नहीं, या फिर कोई छलावा,
रात की धुन ने कहीं खेल तो ना कोई खेला?
झकझोर गया विचार यही, टूट गई निंद्रा,
गूँज थी अभी भी वहीं, सफल हो गया जागना। ‘तरुण’

The best poem ever written on journey called " LIFE"
ReplyDeleteधन्यवाद 🙏
DeleteAnother master piece - every word is GEM
ReplyDelete🙏
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